Wednesday, 7 November 2012

तन्हाई का सफ़र....

दुनीया के भीड़ से दूर 
किसि सुनसान राह पर 
चल पड़ा हुँ एक अनजान तलाश मे... 
हर तरफ सूनापन 
और तन्हाईयों का सफर।
भूल चुका हुँ मै अपना परिचय.....
किसि ने छोड़ा है मुझे इस राह पड़।
जारी है मेरा तन्हाईयों का सफर....!!

tanhaiyo ka aalam...

जैसे गुजरी हो तू अभी मेरे दरवाजे से ,
अब तो हवा भी तेरी पायल की खनक लगती है....