Thursday, 8 November 2012

अनुनाद

जैसे ही उसने कहा हेलो , ......
अंत:मन में एक पायल की झंकार सी बज गई.....
जैसे सितार पर किसी ने तरंग छेड़ दी हो..... .....
एक भावनाओ का सैलाब सा आ गया ....
एक अजीब सा दिल में अनुनाद होने लगा...
और हाथो में भी....
.सेल फोन हाथ से छूट कर जमीन पर गिरा....
और साथ में गिरा ले गया उम्मीद भी....
जमीन पर बिखर गयी तरंग ,भावनाए और अनुनाद....... 
फोन की बेटरी ,सिम ,कवर की तरह....

लापरवाह


तेरा ये इल्जाम सरासर गलत है
मेरे लापरवाह होने का ,
तेरा गम
तेरा  दर्द
तेरी यादे
और वो तेरा अधूरा ख़त.....
सदियों से दिल के करीब रखा है संभाल कर....