Thursday, 25 July 2013

रोज ख़त लिखता हूँ में तुम्हे...और फिर फाड़ देता हूँ....
लेकिन आज नहीं फेंकूंगा....रखूँगा इसे सिरहाने के नीचे रोज...तुम्हारे आ जाने तक....
और मुझे पता है...तुम अपना अधूरा ख़त पूरा करने जरूर आओगी...
में इंतजार करूँगा तुम्हारा क़यामत के बाद भी....नरेन्द्र धाकड़''आमीन'
 

Wednesday, 10 July 2013

भ्रम !
अंत तक रहेगा,
क्योंकि सच्चाई जटिल है उन लोगो के लिए
जो इसे स्वीकार करना ही नहीं चाहते है,
फिर वो सब एकाएक चीखेंगे 
करेंगे दुआये ,
उस परमसत्ता से 
जो दरअसल शुरुआत से ही मृग मरीचिका है!!!
करोडो साल पहले डायनासोर 
नहीं लिखते थे......वेद.....कविता ...कहनियाँ....
सब कुछ ख़त्म होने पर
फिर कुछ समझदार प्राणी पनपेंगे...और उसी के साथ
पनपने लगेगा ईश्वर का भी अस्तित्व..................''नरेन्द्र''
क्या मिला तुम्हे 
क्रन्तिकारी कविताओ से ,
सदियों से रंगते कागजो में 
तुम्हारा खून जम सा गया है
अजीब सड़ांध की बदबू
खुरदरे कागजो से आती है अब ,
तुमने कभी सोचा है 
शोषण और दमन पर लिखी 
तुम्हारी कविताये 
चीखती है चिल्लाती है 
की उन्हें चाहिए आज़ादी...
वो उतार फेक देना चाहती है तुम्हारे झूठे नकाब....
कविताओ के क्रन्तिकारी शब्द
कागजो से निकल...
बनना चाहते है...हथोडा और तलवार....
चुप रहो तुम
तब तक ,
जब तक तुम्हारी झुकी कमर 
जर्जर देह का बोझ ढो सके,
तुम्हारे द्वारा किये उपकार नकार न दिए जाये
उनके कथित परमात्मा की तरह,
और तुम्हरे द्वारा की गई आखिरी खून की उलटी तक
तुम चुप ही रहना....
क्योंकि उनकी नजर में 
तुम्हारी (अ)नैतिकता 
उनके परमात्मा को नकार देने की...खोल देती है 
तुम्हारे लिए नर्क के द्वार......''नरेन्द्र''....

दूत !!

क्रांति के दूत 
तूम 
बदल देना चाहते हो 
सियायसी हलचल,
मुमकिन है 
तुम सोचते हो 
या शायद हो भ्रम में 
कि 
लेनिन ,चेरग्वा ने रंगे होगे 
सिर्फ सुन्दर कागज 
हासिये-हथोडो की बातो से ,
तभी तो तुम लिखते हो
हर मार्मिक,संवेदशील बात पर
वाह! वाह !!
करने वाली कथित कविता.....
तुमने कभी सोचा है
यदि कभी किसान लिखे
अपने हलो से कविताये !!
तो दुनिया की कब्र पर
उनकी कवितायों के शब्द
होगे बहुत उपजाऊ.......नरेन्द्र..

कविता ''खुद पर एक कटाक्ष''-



बेखोफ रहो तुम!!!

मेरी कविताओ से,


ये सिर्फ ढकोसला है 


बदचलन बिरादरी के लिए


आखिर पेट के कीड़ो को शांत करने के लिए 


मेरा 'संवेदनशील होना' भी तो जरूरी है.....


ओर निर्णायको की मजबूरी भी!!!


'नरेन्द्र '