चुप रहो तुम
तब तक ,
जब तक तुम्हारी झुकी कमर
जर्जर देह का बोझ ढो सके,
तुम्हारे द्वारा किये उपकार नकार न दिए जाये
उनके कथित परमात्मा की तरह,
और तुम्हरे द्वारा की गई आखिरी खून की उलटी तक
तुम चुप ही रहना....
क्योंकि उनकी नजर में
तुम्हारी (अ)नैतिकता
उनके परमात्मा को नकार देने की...खोल देती है
तुम्हारे लिए नर्क के द्वार......''नरेन्द्र''....
तब तक ,
जब तक तुम्हारी झुकी कमर
जर्जर देह का बोझ ढो सके,
तुम्हारे द्वारा किये उपकार नकार न दिए जाये
उनके कथित परमात्मा की तरह,
और तुम्हरे द्वारा की गई आखिरी खून की उलटी तक
तुम चुप ही रहना....
क्योंकि उनकी नजर में
तुम्हारी (अ)नैतिकता
उनके परमात्मा को नकार देने की...खोल देती है
तुम्हारे लिए नर्क के द्वार......''नरेन्द्र''....
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