Wednesday, 10 July 2013

कविता ''खुद पर एक कटाक्ष''-



बेखोफ रहो तुम!!!

मेरी कविताओ से,


ये सिर्फ ढकोसला है 


बदचलन बिरादरी के लिए


आखिर पेट के कीड़ो को शांत करने के लिए 


मेरा 'संवेदनशील होना' भी तो जरूरी है.....


ओर निर्णायको की मजबूरी भी!!!


'नरेन्द्र '

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