Wednesday, 1 May 2013

वादा



चाँद भी जानता है मेरी वेदना
करुण हो रो देता है वो भी अक्सर ,
जब कभी तुम होती हो साथ मेरे
तो शिकायते करता है वो मुझसे
उसे भूल जाने की,
अक्सर हम रात भर बतियाते है तुम्हारे बारे में
कुछ मीठी
कुछ झीनी तनहइयो की
कुछ वेदनाओ की बातें...
विदा देता हूँ अब चाँद को
आखिर मोहब्बत हमने की है...
उसे क्यों रोज रात भर जगाया जाये,
चलते वक़्त आज चाँद ने
एक वादा लिया है मुझसे
की कभी किसी दिन हम दोनों साथ बैठ
आहिस्ता से हाथ में हाथ लिए
सुनायेंगे चाँद को हमारी दास्ताँ-ए-मोहब्बत...
मेने बिना तुमसे पूछे उससे हा कह दिया
बोलो हम पूरा कर्नेगे न  चाँद से किया वादा??
-नरेन्द्र धाकड़ ''आमीन''

मेरा पतझड़





















क्या यही पतझड़ है??
कुछ सूखे पत्ते 
और तपती दुपहरी ,
थोडा सा वीराना 
और कुछ खामोसी...
तो फिर कभी 
झांकना मत मेरे अंतर्मन में 
पतझड़ का वीराना 
गर्मी की झुलस 
और खामोसी की चीख..
घबरा जाओगी तुम
या शायद मुमकिन है
तुम इस पर यकीन न करो !!

-नरेन्द्र धाकड़ ''आमीन'