तुम्हे याद है उस दिन तुमने कहा था
ऐसा कोई लम्हा नहीं होगा जब तुम्हे मेरी जरूरत हो और में तुम्हारे साथ न रहूँ...
में कितना खुश हुआ था....इसलिए नहीं की तुम मेरे दुःख बाँट लोगी...
इसलिए की इसी बहाने तुमसे मिल तो लूँगा....
लेकिन में सावन सा बरसता रहा....और तुम हवा के झोंको के संग न जाने कहा उड़ चली...
मुझे बरसता छोड़ कर..
में सूखे पत्तो सा झड़ता रहा...पतझड़ से पहले भी..और बाद भी...
या शायद तुमने सोचा की में इतने सालों तक रोया ही नहीं!!!

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