क्रांति के दूत
तूम
बदल देना चाहते हो
सियायसी हलचल,
मुमकिन है
तुम सोचते हो
या शायद हो भ्रम में
कि
लेनिन ,चेरग्वा ने रंगे होगे
सिर्फ सुन्दर कागज
हासिये-हथोडो की बातो से ,
तभी तो तुम लिखते हो
हर मार्मिक,संवेदशील बात पर
वाह! वाह !!
करने वाली कथित कविता.....
तुमने कभी सोचा है
यदि कभी किसान लिखे
अपने हलो से कविताये !!
तो दुनिया की कब्र पर
उनकी कवितायों के शब्द
होगे बहुत उपजाऊ.......नरेन्द्र..
तूम
बदल देना चाहते हो
सियायसी हलचल,
मुमकिन है
तुम सोचते हो
या शायद हो भ्रम में
कि
लेनिन ,चेरग्वा ने रंगे होगे
सिर्फ सुन्दर कागज
हासिये-हथोडो की बातो से ,
तभी तो तुम लिखते हो
हर मार्मिक,संवेदशील बात पर
वाह! वाह !!
करने वाली कथित कविता.....
तुमने कभी सोचा है
यदि कभी किसान लिखे
अपने हलो से कविताये !!
तो दुनिया की कब्र पर
उनकी कवितायों के शब्द
होगे बहुत उपजाऊ.......नरेन्द्र..
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