Tuesday, 20 November 2012

गूँज

न कोई स्वर
न राग
न तराना
न जाने फिर
ये दिल में
अनुनाद सा क्यों है....
कभी गूंजती है
पायल की झंकार
तो कभी घुंगरू की खनक...
खामोसी है चारो और
न जाने फिर
ये दिल में
अनुनाद सा क्यों है....

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