पहली बारिस में , मिटटी की सौंधी महक सी ''माँ''....
झुलसती गर्मी में , नीबू पानी सी माँ...
आँगन बुहारती ,घर को संभालती
अल्ह्हड़ सी , खुशमिजाज सी माँ.....
कभी हंसाती, कभी रुलाती
कभी डांटती ,कभी मनाती
कभी सीखती ,कभी सीखाती
पत्नी ,बेटी ,बहु,पड़ोसन...
एक साथ जाने कितने रिश्ते निभाती
दुनिया का एक रहस्य सी माँ....
झुलसती गर्मी में , नीबू पानी सी माँ...
आँगन बुहारती ,घर को संभालती
अल्ह्हड़ सी , खुशमिजाज सी माँ.....
कभी हंसाती, कभी रुलाती
कभी डांटती ,कभी मनाती
कभी सीखती ,कभी सीखाती
पत्नी ,बेटी ,बहु,पड़ोसन...
एक साथ जाने कितने रिश्ते निभाती
दुनिया का एक रहस्य सी माँ....
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