Saturday, 15 December 2012

तलाश


कुछ अधूरे ख्याब....
जिनकी तलाश में में भटक रहा हूँ.....
सदियों से.....
जाने मुझे मंजिल मिलेगी भी या नहीं....
में बस चला जा रहा हूँ.....
एक अनजाने सफ़र पर....
तन्हाई के सफ़र पर......
यही सोचते हुए की कहीं किसी रोज मिलेगी वो.....
किसी मोड़ पर मुस्कुराते हुए....
देखते ही मुझे ले लेगी आगोस में..
या फिर कहीं वीराने में...सुनसान बैठी होगी इंतजार में मेरे.....
पतझड़ में कहीं सूखे पत्तो के बीच तलाश रही होगी मुझे.....
या शायद वो मिले किसी दरिया के पास...मेरी तन्हाई से बेखर...खिलखिलाती हुई....पानी से उठ्खेलिया करती हुई....
संभव है की मुझे मिले वो किसी  पहाड़ी पर,,,
शून्य की और ताकती हुई....खुद से ही बतयाती हुई ....
पिघलती बर्फ के बीच....खुद को पिघला देने को आतुर....या शायद सुनहरे बर्फ के बीच अतीत को याद करती हुई ....सुनहरे भविष्य का तानाबाना बुनती मिले....
-नरेन्द्र धाकड़ ''आमीन'' 

1 comment:

  1. janaab bilkul mere khyaalaat hain kisi ke baare me

    sach me shayad is vishay par likhne kii icha ab nhi hogi iski sampoornta ke baad

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