Thursday, 29 November 2012

कशिस

है 
कोई कशिस 
तेरी वफाओ में 
जरूर ,
यूँ 
बेवजह 
रातो में उठ-२ कर 
कोई रोता नहीं...
            -नरेन्द्र धाकड़ ''आमीन''

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